हाल ही में छग आरक्षण मामले में हाई कोर्ट के द्वारा 58% आरक्षण को असंवैधानिक बताकर निरस्त करते हुए कहा की आरक्षण 50% से अधिक नही होनी चाहिए .इस फैसले के बाद वर्तमान में छग में कोई आरक्षण नीति/कानून लागु नही है , इसका परिणाम यह है की विभाग इस असमंजस में है की वह आरक्षण की किस रोस्टर प्रणाली का पालन करे .अभी तक मिली जानकारी के अनुसार छग सरकार द्वारा कोई अध्यादेश / रोस्टर प्रणाली जारी नही किया गया है .
वर्तमान में छग में कोई आरक्षण नीति/कानून नही होने की वजह से छग की कई भर्तियाँ अधर में है .पीएससी भर्ती २०२१, चपरासी भर्ती 2022, सब इंस्पेक्टर भर्ती , पटवारी भर्ती एवं अन्य भर्तियों को स्थगित कर दिया गया है .आगामी पीएससी भर्ती २०२२,शिक्षक भर्ती कुल 12489 , पटवारी भर्ती, हॉस्टल वार्डन , राजस्व निरीक्षक भर्ती अन्य बड़ी भर्तियाँ रुक गई है .
छग के युवा क्यों परेशान है ???
छग के युवा जो वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे है , अब उनका भविष्य अंधकार में लग रहा है .छग युवाओं का मांग है की हाई कोर्ट के निर्देशानुसार छग में 50% आरक्षण नीति/कानून जल्दी लाये जिससे रुकी भर्तियाँ की प्रक्रिया आगे बढ़े .इसके लिए उन्होंने ट्विटर कैम्पियन भी कर रहे है और कल बिलासपुर में कैंडल मार्च भी निकाला.
छग आदिवासी नृत्य महोत्सव का कर रहे है, बहिष्कार
वही दूसरी ओर हाई कोर्ट के फैसले के बाद आदिवासी समाज 32% आरक्षण की मांग कर रही है , इसके उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी दिया है और छग आदिवासी नृत्य समारोह का बहिष्कार भी किया है .साथ ही साथ सरकार को चेतावनी भी दी है की यदि मांग पूरी नही होने पर बृहद रूप से आन्दोलन करेगें .
इस मामले में छग सरकार की, अब तक क्या प्रगति है ??
इस मामले में छग सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल कर दिया है .जनसँख्या के अनुपात में आरक्षण लागु करने के लिए , जिन राज्यों में 50% से अधिक आरक्षण है, उन राज्यों का आरक्षण नीति का अध्यनन करने हेतु अपने अधिकारियों को भेज दिया है . ओबीसी एवं इडब्लूएस के क्वांटी फयबल डाटा के लिए आयोग का अवधि दिसम्बर तक बढ़ा दिया गया है .
आरक्षण मामले में छग का क्या इतिहास है, समझें .
छग राज्य स्थपना के बाद छग में 50% आरक्षण लागु था ,जिसमे अनुसूचित जनजाति को 20% , अनुसूचित जाति को 16% एवं पिछड़ा वर्ग को 14% आरक्षण दिया गया था . २०११ की जनगणना के बाद बीजेपी सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति को उनके जनसँख्या के अनुपात में आरक्षण देने हेतु नई आरक्षण नीति लेकर आई जिसमे अनुसूचित जनजाति को 32% , अनुसूचित जाति को 12% एवं पिछड़ा वर्ग को 14% कुल मिलाकर 58% आरक्षण दिया गया .सुप्रीम कोर्ट का आरक्षण मामले में यह निर्देश है की आरक्षण 50% से अधिक नही होना चाहिए .58% आरक्षण को लेकर 2012 में हाई कोर्ट में एक याचिका डाला गया , जिसका फैसला २०२२ में हाई कोर्ट ने सुनते हुए 58% आरक्षण को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया .
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